28 अगस्त 2026 चंद्र ग्रहण: 27 नक्षत्रों के अनुसार प्रभाव

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28 अगस्त 2026 चंद्र ग्रहण: 27 नक्षत्रों के अनुसार प्रभाव
Bhavishyat.Org • 28 अगस्त 2026 चंद्र ग्रहण विशेष अध्ययन

यदि आपको अपनी चंद्र राशि के साथ जन्मनक्षत्र भी ज्ञात है, तो 28 अगस्त 2026 के ग्रहण को अधिक सूक्ष्मता से पढ़ा जा सकता है। ग्रहण-समय चन्द्र कुंभ के शतभिषा नक्षत्र में है। नीचे सभी 27 नक्षत्र दिए गए हैं। अपने नक्षत्र का नाम खोलें; उसमें नक्षत्र-स्वामी, अधिदेवता, मूल स्वभाव और शतभिषा गोचर के सापेक्ष ताराबल का सामान्य संकेत मिलेगा।

नक्षत्र-फल को कैसे पढ़ें?

राशि जीवन-क्षेत्र बताती है, नक्षत्र प्रतिक्रिया की सूक्ष्म शैली को अधिक स्पष्ट करता है। उदाहरण के लिए एक ही मेष राशि में अश्विनी शीघ्र निर्णय और आरम्भ की ओर झुक सकती है, भरणी सीमा और उत्तरदायित्व को अधिक गंभीरता से ले सकती है और कृत्तिका छँटाई तथा स्पष्ट निर्णय की ओर जाती है। इसलिए राशि का एक ही फल तीन अलग नक्षत्रों में अलग तरह से अनुभव हो सकता है।

ताराबल नौ श्रेणियों में पढ़ा जाता है—जन्म, सम्पत, विपत, क्षेम, प्रत्यरि, साधक, नैधन, मित्र और परममित्र। यहाँ 28 अगस्त के गोचर चन्द्र को शतभिषा मानकर जन्मनक्षत्र से उसकी गणना दी गई है। यह किसी अच्छे या बुरे परिणाम की गारंटी नहीं है। विशेषकर ग्रहण में ताराबल को जन्मकुंडली के अन्य तत्वों के साथ ही पढ़ना चाहिए।

महत्वपूर्ण: भारत में यह ग्रहण दिखाई नहीं देगा और सामान्य सूतक मान्य नहीं है। नक्षत्र-फल का उद्देश्य व्यक्तिगत निर्णय में सावधानी और आत्मसमीक्षा जोड़ना है, धार्मिक भय पैदा करना नहीं।

अपने जन्मनक्षत्र को चुनें

01 अश्विनी मेष • साधक तारा

स्वामी: केतु   अधिदेवता: अश्विनी कुमार   मूल स्वभाव: आरम्भ, गति, उपचार और शीघ्र निर्णय।

28 अगस्त को गोचर चन्द्र शतभिषा में है। अश्विनी जन्मनक्षत्र से शतभिषा तक गणना करने पर यह साधक तारा बनता है। लंबित कार्य पूरा करने और व्यवस्थित प्रगति के लिए ऊर्जा मिल सकती है। परिणाम पाने के लिए एक लक्ष्य पर केंद्रित रहें।

अश्विनी कुमार से जुड़ा प्रतीक इस समय आरम्भ, गति, उपचार और शीघ्र निर्णय को संतुलित ढंग से अपनाने की याद दिलाता है। एक लंबित काम चुनकर पूरा करें और उसी दिन नई जिम्मेदारियों की सूची छोटी रखें। ग्रहण भारत में दृश्य नहीं है, इसलिए सूतक-आधारित कठोरता की आवश्यकता नहीं है।

02 भरणी मेष • प्रत्यरि तारा

स्वामी: शुक्र   अधिदेवता: यम   मूल स्वभाव: सीमा, उत्तरदायित्व, धारण-शक्ति और परिणाम स्वीकारना।

28 अगस्त को गोचर चन्द्र शतभिषा में है। भरणी जन्मनक्षत्र से शतभिषा तक गणना करने पर यह प्रत्यरि तारा बनता है। विरोध, मतभेद या बाधा को व्यक्तिगत युद्ध न बनाएं। समय, दस्तावेज और शांत संवाद से परिस्थिति संभालें।

यम से जुड़ा प्रतीक इस समय सीमा, उत्तरदायित्व, धारण-शक्ति और परिणाम स्वीकारना को संतुलित ढंग से अपनाने की याद दिलाता है। किसी महत्वपूर्ण संदेश को भेजने से पहले दोबारा पढ़ें; तथ्य और अनुमान अलग लिखें। ग्रहण भारत में दृश्य नहीं है, इसलिए सूतक-आधारित कठोरता की आवश्यकता नहीं है।

03 कृत्तिका मेष–वृषभ • क्षेम तारा

स्वामी: सूर्य   अधिदेवता: अग्नि   मूल स्वभाव: छँटाई, स्पष्टता, शुद्धि और निर्णायकता।

28 अगस्त को गोचर चन्द्र शतभिषा में है। कृत्तिका जन्मनक्षत्र से शतभिषा तक गणना करने पर यह क्षेम तारा बनता है। जो पहले से ठीक चल रहा है उसे सुरक्षित रखना, व्यवस्था मजबूत करना और अनावश्यक प्रयोग घटाना लाभकारी रहता है।

अग्नि से जुड़ा प्रतीक इस समय छँटाई, स्पष्टता, शुद्धि और निर्णायकता को संतुलित ढंग से अपनाने की याद दिलाता है। धन या संबंध के निर्णय में मौखिक बात को लिखित रूप दें और समय-सीमा साफ करें। ग्रहण भारत में दृश्य नहीं है, इसलिए सूतक-आधारित कठोरता की आवश्यकता नहीं है।

04 रोहिणी वृषभ • विपत तारा

स्वामी: चन्द्र   अधिदेवता: प्रजापति   मूल स्वभाव: विकास, आकर्षण, संसाधन और स्थायित्व।

28 अगस्त को गोचर चन्द्र शतभिषा में है। रोहिणी जन्मनक्षत्र से शतभिषा तक गणना करने पर यह विपत तारा बनता है। यात्रा, संचार और जल्दबाजी में अतिरिक्त सावधानी रखें। जोखिम घटाना इस तारा का बेहतर उपयोग है।

प्रजापति से जुड़ा प्रतीक इस समय विकास, आकर्षण, संसाधन और स्थायित्व को संतुलित ढंग से अपनाने की याद दिलाता है। दिनचर्या में एक स्थिर बिंदु रखें—समय पर भोजन, पर्याप्त जल और नियत विश्राम। ग्रहण भारत में दृश्य नहीं है, इसलिए सूतक-आधारित कठोरता की आवश्यकता नहीं है।

05 मृगशिरा वृषभ–मिथुन • सम्पत तारा

स्वामी: मंगल   अधिदेवता: सोम   मूल स्वभाव: खोज, जिज्ञासा, यात्रा और विकल्पों की तलाश।

28 अगस्त को गोचर चन्द्र शतभिषा में है। मृगशिरा जन्मनक्षत्र से शतभिषा तक गणना करने पर यह सम्पत तारा बनता है। संसाधन, कमाई और उपयोगिता पर व्यावहारिक दृष्टि सहायक रहती है। अवसर दिखे तो भी संख्या और शर्तें पढ़ें।

सोम से जुड़ा प्रतीक इस समय खोज, जिज्ञासा, यात्रा और विकल्पों की तलाश को संतुलित ढंग से अपनाने की याद दिलाता है। जिस विषय पर मन बार-बार लौट रहा है, उसकी तीन वास्तविक वजहें लिखें; कल्पना और तथ्य अलग करें। ग्रहण भारत में दृश्य नहीं है, इसलिए सूतक-आधारित कठोरता की आवश्यकता नहीं है।

06 आर्द्रा मिथुन • जन्म तारा

स्वामी: राहु   अधिदेवता: रुद्र   मूल स्वभाव: तीव्र परिवर्तन, भावनात्मक शोधन और पुनर्गठन।

28 अगस्त को गोचर चन्द्र शतभिषा में है। आर्द्रा जन्मनक्षत्र से शतभिषा तक गणना करने पर यह जन्म तारा बनता है। मन और पहचान से जुड़े विषय संवेदनशील हो सकते हैं। प्रतिक्रिया से पहले विराम लें और शरीर/नींद की सामान्य दिनचर्या बनाए रखें।

रुद्र से जुड़ा प्रतीक इस समय तीव्र परिवर्तन, भावनात्मक शोधन और पुनर्गठन को संतुलित ढंग से अपनाने की याद दिलाता है। एक लंबित काम चुनकर पूरा करें और उसी दिन नई जिम्मेदारियों की सूची छोटी रखें। ग्रहण भारत में दृश्य नहीं है, इसलिए सूतक-आधारित कठोरता की आवश्यकता नहीं है।

07 पुनर्वसु मिथुन–कर्क • परममित्र तारा

स्वामी: गुरु   अधिदेवता: अदिति   मूल स्वभाव: पुनःस्थापना, वापसी, आशा और सही आधार।

28 अगस्त को गोचर चन्द्र शतभिषा में है। पुनर्वसु जन्मनक्षत्र से शतभिषा तक गणना करने पर यह परममित्र तारा बनता है। सहयोग और स्पष्टता अपेक्षाकृत बेहतर रह सकती है, फिर भी ग्रहण को स्वतः शुभ मुहूर्त न मानें; महत्वपूर्ण निर्णय का स्वतंत्र परीक्षण करें।

अदिति से जुड़ा प्रतीक इस समय पुनःस्थापना, वापसी, आशा और सही आधार को संतुलित ढंग से अपनाने की याद दिलाता है। किसी महत्वपूर्ण संदेश को भेजने से पहले दोबारा पढ़ें; तथ्य और अनुमान अलग लिखें। ग्रहण भारत में दृश्य नहीं है, इसलिए सूतक-आधारित कठोरता की आवश्यकता नहीं है।

08 पुष्य कर्क • मित्र तारा

स्वामी: शनि   अधिदेवता: बृहस्पति   मूल स्वभाव: पोषण, अनुशासन, संस्थागत संरक्षण और कर्तव्य।

28 अगस्त को गोचर चन्द्र शतभिषा में है। पुष्य जन्मनक्षत्र से शतभिषा तक गणना करने पर यह मित्र तारा बनता है। विश्वसनीय लोगों, सहयोगी टीम और पुराने अच्छे संपर्क से सहायता मिल सकती है। सलाह सुनें, फिर अपने तथ्य जाँचें।

बृहस्पति से जुड़ा प्रतीक इस समय पोषण, अनुशासन, संस्थागत संरक्षण और कर्तव्य को संतुलित ढंग से अपनाने की याद दिलाता है। धन या संबंध के निर्णय में मौखिक बात को लिखित रूप दें और समय-सीमा साफ करें। ग्रहण भारत में दृश्य नहीं है, इसलिए सूतक-आधारित कठोरता की आवश्यकता नहीं है।

09 आश्लेषा कर्क • नैधन तारा

स्वामी: बुध   अधिदेवता: नाग   मूल स्वभाव: गोपनीयता, मनोवैज्ञानिक पकड़, रणनीति और जटिलता।

28 अगस्त को गोचर चन्द्र शतभिषा में है। आश्लेषा जन्मनक्षत्र से शतभिषा तक गणना करने पर यह नैधन तारा बनता है। ग्रहण-दिन बड़े जोखिम, आवेशपूर्ण निर्णय और भय-आधारित निष्कर्ष से बचना अधिक उचित है। सामान्य काम शांत ढंग से करें।

नाग से जुड़ा प्रतीक इस समय गोपनीयता, मनोवैज्ञानिक पकड़, रणनीति और जटिलता को संतुलित ढंग से अपनाने की याद दिलाता है। दिनचर्या में एक स्थिर बिंदु रखें—समय पर भोजन, पर्याप्त जल और नियत विश्राम। ग्रहण भारत में दृश्य नहीं है, इसलिए सूतक-आधारित कठोरता की आवश्यकता नहीं है।

10 मघा सिंह • साधक तारा

स्वामी: केतु   अधिदेवता: पितृ   मूल स्वभाव: वंश, परंपरा, पद, प्रतिष्ठा और पूर्वज-स्मृति।

28 अगस्त को गोचर चन्द्र शतभिषा में है। मघा जन्मनक्षत्र से शतभिषा तक गणना करने पर यह साधक तारा बनता है। लंबित कार्य पूरा करने और व्यवस्थित प्रगति के लिए ऊर्जा मिल सकती है। परिणाम पाने के लिए एक लक्ष्य पर केंद्रित रहें।

पितृ से जुड़ा प्रतीक इस समय वंश, परंपरा, पद, प्रतिष्ठा और पूर्वज-स्मृति को संतुलित ढंग से अपनाने की याद दिलाता है। जिस विषय पर मन बार-बार लौट रहा है, उसकी तीन वास्तविक वजहें लिखें; कल्पना और तथ्य अलग करें। ग्रहण भारत में दृश्य नहीं है, इसलिए सूतक-आधारित कठोरता की आवश्यकता नहीं है।

11 पूर्वाफाल्गुनी सिंह • प्रत्यरि तारा

स्वामी: शुक्र   अधिदेवता: भग   मूल स्वभाव: संबंध, आनंद, सृजन और विश्राम।

28 अगस्त को गोचर चन्द्र शतभिषा में है। पूर्वाफाल्गुनी जन्मनक्षत्र से शतभिषा तक गणना करने पर यह प्रत्यरि तारा बनता है। विरोध, मतभेद या बाधा को व्यक्तिगत युद्ध न बनाएं। समय, दस्तावेज और शांत संवाद से परिस्थिति संभालें।

भग से जुड़ा प्रतीक इस समय संबंध, आनंद, सृजन और विश्राम को संतुलित ढंग से अपनाने की याद दिलाता है। एक लंबित काम चुनकर पूरा करें और उसी दिन नई जिम्मेदारियों की सूची छोटी रखें। ग्रहण भारत में दृश्य नहीं है, इसलिए सूतक-आधारित कठोरता की आवश्यकता नहीं है।

12 उत्तराफाल्गुनी सिंह–कन्या • क्षेम तारा

स्वामी: सूर्य   अधिदेवता: अर्यमा   मूल स्वभाव: समझौता, दायित्व, संरक्षण और स्थायी संबंध।

28 अगस्त को गोचर चन्द्र शतभिषा में है। उत्तराफाल्गुनी जन्मनक्षत्र से शतभिषा तक गणना करने पर यह क्षेम तारा बनता है। जो पहले से ठीक चल रहा है उसे सुरक्षित रखना, व्यवस्था मजबूत करना और अनावश्यक प्रयोग घटाना लाभकारी रहता है।

अर्यमा से जुड़ा प्रतीक इस समय समझौता, दायित्व, संरक्षण और स्थायी संबंध को संतुलित ढंग से अपनाने की याद दिलाता है। किसी महत्वपूर्ण संदेश को भेजने से पहले दोबारा पढ़ें; तथ्य और अनुमान अलग लिखें। ग्रहण भारत में दृश्य नहीं है, इसलिए सूतक-आधारित कठोरता की आवश्यकता नहीं है।

13 हस्त कन्या • विपत तारा

स्वामी: चन्द्र   अधिदेवता: सविता   मूल स्वभाव: कौशल, हाथ का काम, नियंत्रण और व्यावहारिक व्यवस्था।

28 अगस्त को गोचर चन्द्र शतभिषा में है। हस्त जन्मनक्षत्र से शतभिषा तक गणना करने पर यह विपत तारा बनता है। यात्रा, संचार और जल्दबाजी में अतिरिक्त सावधानी रखें। जोखिम घटाना इस तारा का बेहतर उपयोग है।

सविता से जुड़ा प्रतीक इस समय कौशल, हाथ का काम, नियंत्रण और व्यावहारिक व्यवस्था को संतुलित ढंग से अपनाने की याद दिलाता है। धन या संबंध के निर्णय में मौखिक बात को लिखित रूप दें और समय-सीमा साफ करें। ग्रहण भारत में दृश्य नहीं है, इसलिए सूतक-आधारित कठोरता की आवश्यकता नहीं है।

14 चित्रा कन्या–तुला • सम्पत तारा

स्वामी: मंगल   अधिदेवता: त्वष्टा   मूल स्वभाव: रचना, डिजाइन, संरचना और दृश्य प्रभाव।

28 अगस्त को गोचर चन्द्र शतभिषा में है। चित्रा जन्मनक्षत्र से शतभिषा तक गणना करने पर यह सम्पत तारा बनता है। संसाधन, कमाई और उपयोगिता पर व्यावहारिक दृष्टि सहायक रहती है। अवसर दिखे तो भी संख्या और शर्तें पढ़ें।

त्वष्टा से जुड़ा प्रतीक इस समय रचना, डिजाइन, संरचना और दृश्य प्रभाव को संतुलित ढंग से अपनाने की याद दिलाता है। दिनचर्या में एक स्थिर बिंदु रखें—समय पर भोजन, पर्याप्त जल और नियत विश्राम। ग्रहण भारत में दृश्य नहीं है, इसलिए सूतक-आधारित कठोरता की आवश्यकता नहीं है।

15 स्वाती तुला • जन्म तारा

स्वामी: राहु   अधिदेवता: वायु   मूल स्वभाव: स्वतंत्रता, व्यापार, गति, नेटवर्क और अनुकूलन।

28 अगस्त को गोचर चन्द्र शतभिषा में है। स्वाती जन्मनक्षत्र से शतभिषा तक गणना करने पर यह जन्म तारा बनता है। मन और पहचान से जुड़े विषय संवेदनशील हो सकते हैं। प्रतिक्रिया से पहले विराम लें और शरीर/नींद की सामान्य दिनचर्या बनाए रखें।

वायु से जुड़ा प्रतीक इस समय स्वतंत्रता, व्यापार, गति, नेटवर्क और अनुकूलन को संतुलित ढंग से अपनाने की याद दिलाता है। जिस विषय पर मन बार-बार लौट रहा है, उसकी तीन वास्तविक वजहें लिखें; कल्पना और तथ्य अलग करें। ग्रहण भारत में दृश्य नहीं है, इसलिए सूतक-आधारित कठोरता की आवश्यकता नहीं है।

16 विशाखा तुला–वृश्चिक • परममित्र तारा

स्वामी: गुरु   अधिदेवता: इन्द्र-अग्नि   मूल स्वभाव: लक्ष्य, प्रतिस्पर्धा, एकाग्रता और उपलब्धि।

28 अगस्त को गोचर चन्द्र शतभिषा में है। विशाखा जन्मनक्षत्र से शतभिषा तक गणना करने पर यह परममित्र तारा बनता है। सहयोग और स्पष्टता अपेक्षाकृत बेहतर रह सकती है, फिर भी ग्रहण को स्वतः शुभ मुहूर्त न मानें; महत्वपूर्ण निर्णय का स्वतंत्र परीक्षण करें।

इन्द्र-अग्नि से जुड़ा प्रतीक इस समय लक्ष्य, प्रतिस्पर्धा, एकाग्रता और उपलब्धि को संतुलित ढंग से अपनाने की याद दिलाता है। एक लंबित काम चुनकर पूरा करें और उसी दिन नई जिम्मेदारियों की सूची छोटी रखें। ग्रहण भारत में दृश्य नहीं है, इसलिए सूतक-आधारित कठोरता की आवश्यकता नहीं है।

17 अनुराधा वृश्चिक • मित्र तारा

स्वामी: शनि   अधिदेवता: मित्र   मूल स्वभाव: मित्रता, सहयोग, अनुशासन और निष्ठा।

28 अगस्त को गोचर चन्द्र शतभिषा में है। अनुराधा जन्मनक्षत्र से शतभिषा तक गणना करने पर यह मित्र तारा बनता है। विश्वसनीय लोगों, सहयोगी टीम और पुराने अच्छे संपर्क से सहायता मिल सकती है। सलाह सुनें, फिर अपने तथ्य जाँचें।

मित्र से जुड़ा प्रतीक इस समय मित्रता, सहयोग, अनुशासन और निष्ठा को संतुलित ढंग से अपनाने की याद दिलाता है। किसी महत्वपूर्ण संदेश को भेजने से पहले दोबारा पढ़ें; तथ्य और अनुमान अलग लिखें। ग्रहण भारत में दृश्य नहीं है, इसलिए सूतक-आधारित कठोरता की आवश्यकता नहीं है।

18 ज्येष्ठा वृश्चिक • नैधन तारा

स्वामी: बुध   अधिदेवता: इन्द्र   मूल स्वभाव: वरिष्ठता, रक्षा, अधिकार और जिम्मेदारी।

28 अगस्त को गोचर चन्द्र शतभिषा में है। ज्येष्ठा जन्मनक्षत्र से शतभिषा तक गणना करने पर यह नैधन तारा बनता है। ग्रहण-दिन बड़े जोखिम, आवेशपूर्ण निर्णय और भय-आधारित निष्कर्ष से बचना अधिक उचित है। सामान्य काम शांत ढंग से करें।

इन्द्र से जुड़ा प्रतीक इस समय वरिष्ठता, रक्षा, अधिकार और जिम्मेदारी को संतुलित ढंग से अपनाने की याद दिलाता है। धन या संबंध के निर्णय में मौखिक बात को लिखित रूप दें और समय-सीमा साफ करें। ग्रहण भारत में दृश्य नहीं है, इसलिए सूतक-आधारित कठोरता की आवश्यकता नहीं है।

19 मूल धनु • साधक तारा

स्वामी: केतु   अधिदेवता: निर्ऋति   मूल स्वभाव: जड़ तक पहुँचना, विघटन, शोध और मूल कारण।

28 अगस्त को गोचर चन्द्र शतभिषा में है। मूल जन्मनक्षत्र से शतभिषा तक गणना करने पर यह साधक तारा बनता है। लंबित कार्य पूरा करने और व्यवस्थित प्रगति के लिए ऊर्जा मिल सकती है। परिणाम पाने के लिए एक लक्ष्य पर केंद्रित रहें।

निर्ऋति से जुड़ा प्रतीक इस समय जड़ तक पहुँचना, विघटन, शोध और मूल कारण को संतुलित ढंग से अपनाने की याद दिलाता है। दिनचर्या में एक स्थिर बिंदु रखें—समय पर भोजन, पर्याप्त जल और नियत विश्राम। ग्रहण भारत में दृश्य नहीं है, इसलिए सूतक-आधारित कठोरता की आवश्यकता नहीं है।

20 पूर्वाषाढ़ा धनु • प्रत्यरि तारा

स्वामी: शुक्र   अधिदेवता: आपः   मूल स्वभाव: अभियान, विश्वास, शुद्धि और दृढ़ता।

28 अगस्त को गोचर चन्द्र शतभिषा में है। पूर्वाषाढ़ा जन्मनक्षत्र से शतभिषा तक गणना करने पर यह प्रत्यरि तारा बनता है। विरोध, मतभेद या बाधा को व्यक्तिगत युद्ध न बनाएं। समय, दस्तावेज और शांत संवाद से परिस्थिति संभालें।

आपः से जुड़ा प्रतीक इस समय अभियान, विश्वास, शुद्धि और दृढ़ता को संतुलित ढंग से अपनाने की याद दिलाता है। जिस विषय पर मन बार-बार लौट रहा है, उसकी तीन वास्तविक वजहें लिखें; कल्पना और तथ्य अलग करें। ग्रहण भारत में दृश्य नहीं है, इसलिए सूतक-आधारित कठोरता की आवश्यकता नहीं है।

21 उत्तराषाढ़ा धनु–मकर • क्षेम तारा

स्वामी: सूर्य   अधिदेवता: विश्वदेव   मूल स्वभाव: स्थायी विजय, नीति, उत्तरदायित्व और दीर्घ लक्ष्य।

28 अगस्त को गोचर चन्द्र शतभिषा में है। उत्तराषाढ़ा जन्मनक्षत्र से शतभिषा तक गणना करने पर यह क्षेम तारा बनता है। जो पहले से ठीक चल रहा है उसे सुरक्षित रखना, व्यवस्था मजबूत करना और अनावश्यक प्रयोग घटाना लाभकारी रहता है।

विश्वदेव से जुड़ा प्रतीक इस समय स्थायी विजय, नीति, उत्तरदायित्व और दीर्घ लक्ष्य को संतुलित ढंग से अपनाने की याद दिलाता है। एक लंबित काम चुनकर पूरा करें और उसी दिन नई जिम्मेदारियों की सूची छोटी रखें। ग्रहण भारत में दृश्य नहीं है, इसलिए सूतक-आधारित कठोरता की आवश्यकता नहीं है।

22 श्रवण मकर • विपत तारा

स्वामी: चन्द्र   अधिदेवता: विष्णु   मूल स्वभाव: सुनना, सीखना, परंपरा, यात्रा और प्रसार।

28 अगस्त को गोचर चन्द्र शतभिषा में है। श्रवण जन्मनक्षत्र से शतभिषा तक गणना करने पर यह विपत तारा बनता है। यात्रा, संचार और जल्दबाजी में अतिरिक्त सावधानी रखें। जोखिम घटाना इस तारा का बेहतर उपयोग है।

विष्णु से जुड़ा प्रतीक इस समय सुनना, सीखना, परंपरा, यात्रा और प्रसार को संतुलित ढंग से अपनाने की याद दिलाता है। किसी महत्वपूर्ण संदेश को भेजने से पहले दोबारा पढ़ें; तथ्य और अनुमान अलग लिखें। ग्रहण भारत में दृश्य नहीं है, इसलिए सूतक-आधारित कठोरता की आवश्यकता नहीं है।

23 धनिष्ठा मकर–कुंभ • सम्पत तारा

स्वामी: मंगल   अधिदेवता: वसु   मूल स्वभाव: समूह, संसाधन, ताल, प्रतिष्ठा और सामाजिक भागीदारी।

28 अगस्त को गोचर चन्द्र शतभिषा में है। धनिष्ठा जन्मनक्षत्र से शतभिषा तक गणना करने पर यह सम्पत तारा बनता है। संसाधन, कमाई और उपयोगिता पर व्यावहारिक दृष्टि सहायक रहती है। अवसर दिखे तो भी संख्या और शर्तें पढ़ें।

वसु से जुड़ा प्रतीक इस समय समूह, संसाधन, ताल, प्रतिष्ठा और सामाजिक भागीदारी को संतुलित ढंग से अपनाने की याद दिलाता है। धन या संबंध के निर्णय में मौखिक बात को लिखित रूप दें और समय-सीमा साफ करें। ग्रहण भारत में दृश्य नहीं है, इसलिए सूतक-आधारित कठोरता की आवश्यकता नहीं है।

24 शतभिषा कुंभ • जन्म तारा

स्वामी: राहु   अधिदेवता: वरुण   मूल स्वभाव: अनुसंधान, उपचार, गोपनीयता, नियम और व्यापक नेटवर्क।

28 अगस्त को गोचर चन्द्र शतभिषा में है। शतभिषा जन्मनक्षत्र से शतभिषा तक गणना करने पर यह जन्म तारा बनता है। मन और पहचान से जुड़े विषय संवेदनशील हो सकते हैं। प्रतिक्रिया से पहले विराम लें और शरीर/नींद की सामान्य दिनचर्या बनाए रखें।

वरुण से जुड़ा प्रतीक इस समय अनुसंधान, उपचार, गोपनीयता, नियम और व्यापक नेटवर्क को संतुलित ढंग से अपनाने की याद दिलाता है। दिनचर्या में एक स्थिर बिंदु रखें—समय पर भोजन, पर्याप्त जल और नियत विश्राम। ग्रहण भारत में दृश्य नहीं है, इसलिए सूतक-आधारित कठोरता की आवश्यकता नहीं है।

25 पूर्वाभाद्रपद कुंभ–मीन • परममित्र तारा

स्वामी: गुरु   अधिदेवता: अज एकपाद   मूल स्वभाव: आदर्श, तीव्र वैचारिकता, परिवर्तन और तप।

28 अगस्त को गोचर चन्द्र शतभिषा में है। पूर्वाभाद्रपद जन्मनक्षत्र से शतभिषा तक गणना करने पर यह परममित्र तारा बनता है। सहयोग और स्पष्टता अपेक्षाकृत बेहतर रह सकती है, फिर भी ग्रहण को स्वतः शुभ मुहूर्त न मानें; महत्वपूर्ण निर्णय का स्वतंत्र परीक्षण करें।

अज एकपाद से जुड़ा प्रतीक इस समय आदर्श, तीव्र वैचारिकता, परिवर्तन और तप को संतुलित ढंग से अपनाने की याद दिलाता है। जिस विषय पर मन बार-बार लौट रहा है, उसकी तीन वास्तविक वजहें लिखें; कल्पना और तथ्य अलग करें। ग्रहण भारत में दृश्य नहीं है, इसलिए सूतक-आधारित कठोरता की आवश्यकता नहीं है।

26 उत्तराभाद्रपद मीन • मित्र तारा

स्वामी: शनि   अधिदेवता: अहिर्बुध्न्य   मूल स्वभाव: गहराई, स्थिरता, अन्तर्मुखता और दीर्घ सहनशीलता।

28 अगस्त को गोचर चन्द्र शतभिषा में है। उत्तराभाद्रपद जन्मनक्षत्र से शतभिषा तक गणना करने पर यह मित्र तारा बनता है। विश्वसनीय लोगों, सहयोगी टीम और पुराने अच्छे संपर्क से सहायता मिल सकती है। सलाह सुनें, फिर अपने तथ्य जाँचें।

अहिर्बुध्न्य से जुड़ा प्रतीक इस समय गहराई, स्थिरता, अन्तर्मुखता और दीर्घ सहनशीलता को संतुलित ढंग से अपनाने की याद दिलाता है। एक लंबित काम चुनकर पूरा करें और उसी दिन नई जिम्मेदारियों की सूची छोटी रखें। ग्रहण भारत में दृश्य नहीं है, इसलिए सूतक-आधारित कठोरता की आवश्यकता नहीं है।

27 रेवती मीन • नैधन तारा

स्वामी: बुध   अधिदेवता: पूषा   मूल स्वभाव: यात्रा, संरक्षण, समापन और सुरक्षित संक्रमण।

28 अगस्त को गोचर चन्द्र शतभिषा में है। रेवती जन्मनक्षत्र से शतभिषा तक गणना करने पर यह नैधन तारा बनता है। ग्रहण-दिन बड़े जोखिम, आवेशपूर्ण निर्णय और भय-आधारित निष्कर्ष से बचना अधिक उचित है। सामान्य काम शांत ढंग से करें।

पूषा से जुड़ा प्रतीक इस समय यात्रा, संरक्षण, समापन और सुरक्षित संक्रमण को संतुलित ढंग से अपनाने की याद दिलाता है। किसी महत्वपूर्ण संदेश को भेजने से पहले दोबारा पढ़ें; तथ्य और अनुमान अलग लिखें। ग्रहण भारत में दृश्य नहीं है, इसलिए सूतक-आधारित कठोरता की आवश्यकता नहीं है।

कौन-से नक्षत्र ग्रहण-अक्ष के सबसे निकट हैं?

ग्रहण स्वयं शतभिषा में है, इसलिए शतभिषा जन्मनक्षत्र वाले जातक अपने जन्मचन्द्र की डिग्री अवश्य देखें। कुंभ राशि के धनिष्ठा के अंतिम दो चरण और पूर्वाभाद्रपद के पहले तीन चरण भी उसी राशि में हैं; सिंह के मघा, पूर्वाफाल्गुनी और उत्तराफाल्गुनी प्रथम चरण ग्रहण के सामने वाले राशि-क्षेत्र में आते हैं। किंतु केवल नक्षत्र का नाम समान होने से सटीक डिग्री-संयोग सिद्ध नहीं होता।

यदि जन्मचन्द्र लगभग 8° से 13° कुंभ के आसपास है तो ग्रहण-चन्द्र की डिग्री से समीपता अधिक होगी। सिंह में लगभग इसी डिग्री के जन्मग्रह विरोधी ग्रहण-अक्ष के अधिक निकट होंगे। यह सामान्य डिग्री-परास केवल प्रारंभिक छँटाई है; व्यक्तिगत निर्णय के लिए पूरी कुंडली देखना आवश्यक है।

ताराबल की नौ श्रेणियों का संक्षिप्त अर्थ

जन्म मन और पहचान को संवेदनशील करता है। सम्पत संसाधन और उपयोगिता पर ध्यान देता है। विपत जोखिम कम करने की सलाह देता है। क्षेम संरक्षण और स्थिरता का पक्ष है। प्रत्यरि विरोध और बाधा को शांत ढंग से संभालने की मांग करता है। साधक अनुशासित प्रगति के लिए उपयोगी माना जाता है। नैधन में जोखिम घटाना और बड़े निर्णय टालकर जाँचना उचित रहता है। मित्र और परममित्र सहयोग का पक्ष बढ़ाते हैं, फिर भी ग्रहण को मुहूर्त की तरह नहीं लेना चाहिए।

राशि, नक्षत्र और लग्न को साथ कैसे मिलाएँ?

पहले अपनी चंद्र राशि का विस्तृत लेख पढ़ें। उसके भीतर दिए गए नक्षत्र-खंड से अपनी प्रतिक्रिया की सूक्ष्म परत समझें। उसके बाद लग्न लेख पढ़ें, जिससे बाहरी जीवन-क्षेत्र और जिम्मेदारी स्पष्ट होगी। यदि तीनों संकेत एक ही विषय पर जोर देते हैं—जैसे धन, साझेदारी, करियर या स्वास्थ्य-दिनचर्या—तो वह क्षेत्र अधिक ध्यान देने योग्य हो सकता है।

यदि संकेत अलग-अलग हों तो घबराने की आवश्यकता नहीं। कुंडली में एक ही समय कई जीवन-क्षेत्र सक्रिय रह सकते हैं। प्राथमिकता दशा और वास्तविक जीवन की वर्तमान परिस्थिति से तय होगी। सामान्य ग्रहण लेख किसी निष्क्रिय समस्या को पैदा नहीं करता; वह पहले से सक्रिय विषयों को पहचानने का एक ज्योतिषीय उपकरण है।

अपना जन्मनक्षत्र या ग्रहण-समीपता नहीं जानते?

जन्मतिथि, सही समय और स्थान के आधार पर जन्मचन्द्र की राशि, नक्षत्र, चरण और डिग्री ज्ञात की जा सकती है। यदि ग्रहण आपके जन्मचन्द्र या प्रमुख ग्रह से निकट हो तो व्यक्तिगत दशा और ग्रहबल के साथ सूक्ष्म अध्ययन अधिक उपयोगी रहेगा।

व्यक्तिगत सूक्ष्म कुंडली विश्लेषण देखें

ताराबल और नक्षत्र-फल सामान्य वैदिक ज्योतिषीय संकेत हैं। इन्हें स्वास्थ्य, वित्त, विवाह या अन्य महत्वपूर्ण निर्णय का अकेला आधार न बनाएं।

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