साप्ताहिक राशिफल - वृषभ चंद्र राशि

वृषभ साप्ताहिक चंद्र राशिफल | 12 जनवरी 2026 – 18 जनवरी 2026
वृषभ (Vrishabha) • चंद्र राशि

वृषभ साप्ताहिक चंद्र राशिफल

दिनांक: 12 जनवरी 2026 – 18 जनवरी 2026 • राशि अक्षर: (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो) • मुख्य फोकस: धन-संतुलन, परिवार, स्थिरता • सप्ताह मंत्र: ॐ नमः शिवाय

यह राशिफल चंद्र राशि आधारित सामान्य मार्गदर्शन है। व्यक्तिगत दशा–अंतरदशा, जन्म-स्थिति और जीवन-परिस्थितियों के अनुसार अनुभव अलग हो सकते हैं।

1) सप्ताह का सार

यह सप्ताह वृषभ राशि के लिए धन-संतुलन, परिवार, स्थिरता को सक्रिय करता है। 14 जनवरी 2026 की मकर संक्रांति के बाद वातावरण अधिक कर्म-प्रधान होगा—नियम, समय-सीमा, वरिष्ठता, प्रक्रिया और परिणाम की भाषा तेज़ होगी। आप जितना अधिक व्यवस्थित रहेंगे, उतना ही लाभ स्थिर होगा।

मुख्य सावधानी: आलस्य, विलास-खर्च, जिद। मकर में सूर्य–बुध–शुक्र–मंगल की निकट सक्रियता तेज़ प्रतिक्रिया और प्रतिस्पर्धा बढ़ाती है, इसलिए निर्णय ‘तथ्य-आधारित’ रखें।

2) ग्रह-ऊर्जा: मकर-चतुरग्राही का प्रभाव

14 के बाद मकर राशि में सूर्य के साथ बुध, शुक्र और मंगल की सक्रियता ‘चतुरग्राही’ वातावरण बनाती है। यह संयोजन नियम-आधारित कार्य, प्रशासन, लक्ष्य-प्राप्ति, अनुबंध, टीम-मैनेजमेंट और प्रतिस्पर्धा को तीव्र करता है। आपके लिए इसका अर्थ है—काम में गति बढ़ेगी, पर गलती की कीमत भी बढ़ेगी।

गुरु वक्री मिथुन में सीख और रणनीति की पुनर्समीक्षा कराता है; शनि मीन में धैर्य और सीमाएँ तय कराता है। राहु–केतु की धुरी तकनीक/समूह और प्रतिष्ठा के विषयों में वास्तविकता-जाँच कराएगी।

3) चन्द्र-चरण: सप्ताह में मन का मोड

सप्ताह की शुरुआत तुला-चन्द्र से—बातचीत, संतुलन और निर्णय-न्याय। 13 की संध्या से वृश्चिक-चन्द्र—जाँच, सुधार और रणनीति। 15–17 का धनु-चन्द्र—सीख, यात्रा, दिशा-बोध। 18 की संध्या से मकर-चन्द्र—व्यावहारिक निर्णय और जिम्मेदारी। इन चरणों को समझकर दिन-वार लक्ष्य तय करें।

4) करियर/व्यवसाय

प्रक्रिया सुधार; वरिष्ठों का सहयोग नौकरीपेशा हों तो रिपोर्टिंग, समय-सीमा और दस्तावेज़ी सटीकता पर ध्यान दें। मीटिंग में 3 बातें रखें—तथ्य, अगले 7 दिन का प्लान, और जोखिम-बिंदु। व्यवसाय में बिना लिखित शर्त के बड़ी साझेदारी/वादे न करें।

14 के बाद एक ही दिशा चुनें—या तो नया अवसर जोड़ें, या वर्तमान काम का मूल्य बढ़ाएँ। दोनों साथ करने से ऊर्जा बिखर सकती है।

5) शिक्षा/कौशल

पढ़ाई में ‘समय-खंड’ पद्धति अपनाएँ: 2 बड़े विषय (60–75 मिनट) + 1 रिवीजन (25–30 मिनट)। वृश्चिक चरण में गहन अध्ययन, धनु चरण में मॉक-टेस्ट/प्रेज़ेंटेशन लाभकारी। नए टॉपिक से अधिक लाभ कमजोर हिस्से सुधारने में है।

6) धन/लेन-देन

बचत योजना; अनावश्यक खरीद टालें खर्च-ट्रैकिंग रखें। उधार/गारंटी/जोखिम-पूर्ण सौदे में जल्दबाज़ी न करें; लिखित शर्त, वापसी-तिथि और सीमा तय करें।

Disclaimer: निवेश/ट्रेड/फाइनेंस संबंधी कोई भी निर्णय केवल योग्य विशेषज्ञ सलाह के साथ लें; यह सामग्री शैक्षिक/शोध-आधारित है।

7) प्रेम/दाम्पत्य

नरमी से बात; अपेक्षा स्पष्ट रिश्तों में ‘तथ्य → भावना → समाधान’ का नियम अपनाएँ। अविवाहितों के लिए अवसर हैं, पर जल्द वचन/घोषणा से बचें। 18 को विशेष संयम रखें—अमावस्या में कटु शब्द लंबे समय तक असर कर सकते हैं।

8) परिवार/समाज

घर में भूमिकाएँ स्पष्ट करें—कौन क्या करेगा, कब करेगा। सामाजिक/नेटवर्क में लाभ मिल सकता है, पर अफवाह/तीसरे व्यक्ति की बात पर प्रतिक्रिया न दें; सत्यापन करें।

9) स्वास्थ्य

स्वास्थ्य का आधार ‘नींद’ और ‘भोजन-समय’ है। गला/थायरॉयड, शुगर, गर्दन जैसे संकेत उभरें तो देर रात भोजन, अत्यधिक मसाला/मीठा और स्क्रीन-समय सीमित करें। प्रतिदिन 20–30 मिनट चलना और 10 मिनट श्वास-प्रश्वास लाभ देगा।

10) क्या करें / क्या न करें
  • हर दिन 3 प्रमुख कार्य लिखें; उन्हें पूरा करने के बाद ही नए कार्य जोड़ें।
  • महत्वपूर्ण ईमेल/दस्तावेज़ भेजने से पहले 2 बार जाँच करें।
  • आवेग में कॉल/मैसेज/पोस्ट नहीं; 10 मिनट रुककर प्रतिक्रिया दें।
  • बिना दस्तावेज़/शर्त के उधार, गारंटी या साझेदारी नहीं।
  • नींद और भोजन समय स्थिर रखें; स्क्रीन-समय घटाएँ।
11) आध्यात्म/धर्म: संक्रांति + मौनी अमावस्या

14 को मकर संक्रांति—3 नियम लिखें: समय-पालन, सत्यापन, संयमित वाणी। 18 मौनी अमावस्या—मौन, जप, संकल्प; बहस और जल्द निर्णय से बचें।

छोटी पर नियमित साधना: प्रातः “ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः” 11 बार, संध्या दीपक, और सप्ताह में 1 दिन जरूरतमंद को भोजन।

12) दिनानुसार माइक्रो-रणनीति
  • 12: योजना/बातचीत; अधूरे काम सूचीबद्ध करें।
  • 13: जाँच/सुधार; काग़ज़-पत्र/भुगतान-शर्त देखें।
  • 14: लक्ष्य लॉक; नियम तय; समय-तालिका बनाएं।
  • 15–16: निष्पादन तेज; तथ्य के साथ निर्णय।
  • 17: समीक्षा; लंबित कार्य समेटें।
  • 18: मौन/जप/संकल्प; विवाद से दूरी।
13) उपाय

शास्त्रीय उपाय: प्रतिदिन प्रातः “ॐ नमः शिवाय” 108 जप; सोमवार को शिवलिंग पर जल अर्पित करें।

दान: बुधवार/शुक्रवार को अन्न/फल/मिठाई का दान।

वैकल्पिक उपाय – लाल किताब: जरूरतमंद को भोजन/मिठाई दें; बिना कारण कटुता न रखें।

नोट: रत्न-धारण/बड़े अनुष्ठान हेतु व्यक्तिगत कुंडली-आधारित सत्यापन आवश्यक है।

14) निष्कर्ष

समग्र रूप से वृषभ राशि के लिए यह सप्ताह ‘कर्म-निर्णय’ का है। अनुशासन, लिखित योजना और संयमित संवाद अपनाएँ—तो 14 के बाद अवसरों की गति आपके पक्ष में जाएगी। आलस्य, विलास-खर्च, जिद से बचें और स्वास्थ्य-रूटीन स्थिर रखें।

आपकी फ़ेसबुक आईडी से कमेन्ट कीजिए

शेयर कीजिए 

हमारी सेवाओं का लाभ लीजिए। 

Bhavishyat.Org