वृश्चिक राशि में बुध वक्री का कर्क राशि पर प्रभाव जानें

 

वृश्चिक राशि में बुध का वक्री होना एक महत्वपूर्ण खगोलीय घटना है, जो ज्योतिषीय दृष्टिकोण से कई मायनों में महत्त्व रखती है। जब बुध वक्री होता है, तो इसका अर्थ है कि वह पृथ्वी के सापेक्ष पीछे की ओर बढ़ता हुआ प्रतीत होता है। यह स्थिति सामान्यतः संचार, विचारों और यात्राओं को प्रभावित करती है। इस समय दौरान, हमारी सोच और संवादों में भ्रम उत्पन्न होने की संभावना अधिक हो जाती है।

कर्क राशि के जातकों के लिए बुध का वक्री होना विशेष रूप से महत्व रखता है। इन जातकों में भावनाओं की गहराई और संवेदनशीलता होती है, जो इस अवधि में बढ़ सकती है। बुध के वक्री होने से कर्क राशि के लोग अपने व्यक्तिगत व पेशेवर जीवन में पूर्वाग्रह और असामान्य चुनौतियों का सामना कर सकते हैं। यह समय विशेष रूप से आत्मनिषेध, संबंधों और पारिवारिक मुद्दों पर विचार करने का संकेत भी देता है।

इस खंड में, हम इस खगोलीय घटना के प्रभावों की गहरी पड़ताल करेंगे, जिससे कर्क राशि के जातक यह समझ सकें कि बुध की वक्री स्थिति उनके लिए क्या किया सकती है। यह जानना महत्वपूर्ण है कि इस अवधि में निर्णय लेने में सतर्कता बरतनी चाहिए क्योंकि मन की स्थिति अस्थिर हो सकती है। इसके अतिरिक्त, यह समय स्वंय के विचारों और भावनाओं पर ध्यान केंद्रित करने का है, ताकि व्यक्तिगत विकास और समझ में वृद्धि हो सके। इस प्रकार, बुध का वक्री होना वृश्चिक राशि में कर्क राशि के जातकों के लिए एक अवसर भी प्रदान करता है, जो उन्हें अपने आंतरिक संसार की गहराई में जाने का प्रोत्साहन देता है।

परिवार पर प्रभाव

वृश्चिक राशि में बुध वक्री होने पर कर्क राशि के जातकों के परिवारिक जीवन में कई महत्वपूर्ण परिवर्तन हो सकते हैं। इस खगोलीय घटना के दौरान, जातक अपने परिवार के सदस्यों के साथ संवाद में कुछ बाधाओं का अनुभव कर सकते हैं। संवाद की यह विफलता अक्सर पारिवारिक संबंधों में तनाव का कारण बन सकती है। विशेषकर, कर्क राशि के जातकों को अपनी भावनाओं को स्पष्ट रूप से व्यक्त करने में कठिनाई हो सकती है, जिससे पारिवारिक सदस्यों के बीच misunderstandings उत्पन्न हो सकते हैं।

इस दौरान, परिवार के भीतर भावनात्मक उतार-चढ़ाव की संभावना भी बढ़ जाती है। जब बुध वक्री होता है, तो यह एक सूचना का ग्रह होने के कारण, परिवार में सूचनाओं का आदान-प्रदान भी प्रभावित हो सकता है। कर्क राशि के जातक को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे अपनी भावनाओं और विचारों को स्पष्टता के साथ साझा करते हैं ताकि उनके परिवार में सामंजस्य बना रह सके। छोटे-मोटे विवादों का निवारण समय पर करना अत्यंत महत्वपूर्ण है, ताकि समस्याएं छोटी रह सकें।

इसके अतिरिक्त, आशा और सहानुभूति का मूल्य बढ़ जाता है। परिवार के सदस्यों को एक-दूसरे के प्रति अधिक सहानुभूतिपूर्ण और समझदारी से कार्य करना चाहिए। यदि संवाद में बाधाएँ उत्पन्न होती हैं, तो संवाद के अन्य तरीकों का उपयोग करने पर विचार करना लाभकारी हो सकता है। उदाहरण के लिए, पत्र या संदेश के माध्यम से अपनी भावनाओं को व्यक्त करना एक अच्छा विकल्प हो सकता है। अंततः, इस अवधि के दौरान अगर कर्क राशि के जातक सतर्क रहते हैं और पारिवारिक संबंधों पर ध्यान केंद्रित करते हैं, तो वे इस कठिन समय में सामंजस्य बना सकते हैं।

स्वास्थ्य पर प्रभाव

बुध वक्री की स्थिति कर्क राशि के जातकों के स्वास्थ्य पर विशेष प्रभाव डालती है। जब बुध वक्री होता है, तो यह मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक स्थिति और शारीरिक स्वास्थ्य में असंतुलन का कारण बन सकता है। कर्क राशि के जातक, जो स्वभाव से संवेदनशील और भावुक होते हैं, बुध वक्री के दौरान तनाव, चिंता और अवसाद का अनुभव कर सकते हैं। इन्हें अपनी मानसिक स्थिति पर ध्यान देने की आवश्यकता है और इष्ट मित्रों तथा परिवार के साथ समय बिताना सहायक हो सकता है।

शारीरिक स्वास्थ्य पर भी यह स्थिति प्रभाव डाल सकती है। बुध का वक्री होने से पाचन संबंधी समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं, जिससे शारीरिक स्वास्थ्य प्रभावित होता है। कर्क राशि के जातकों को इस अवधि में उचित आहार का पालन करने की सलाह दी जाती है। ताजे फल और सब्जियाँ, प्रोटीन से भरपूर आहार और हाइड्रेशन का ध्यान रखने से शरीर को आवश्यक पोषण मिलता है।

इसके अतिरिक्त, बुध वक्री के समय, कर्क राशि के जातक छोटी-मोटी स्वास्थ्य समस्याओं जैसे कि सर्दी, खाँसी या एलर्जी का सामना कर सकते हैं। नियमित व्यायाम और योगाभ्यास करने से इन परेशानियों को कम किया जा सकता है। मानसिक तनाव को कम करने के लिए श्वास क्रियाएँ और ध्यान भी अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो सकते हैं।

इस समय स्वस्थ आदतों को अपनाना बेहद आवश्यक है। समुचित नींद, संतुलित आहार और नियमित व्यायाम से कर्क राशि के जातक अपने स्वास्थ्य को बनाए रख सकते हैं। मानसिक स्वास्थ्य को स्थिर रखने के लिए ध्यान और सकारात्मक सोच अपनाना भी फायदेमंद रहेगा। स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति सजग रहना और जरूरत पड़ने पर चिकित्सा सलाह लेना भी उचित है। इस प्रकार, बुध वक्री के प्रभाव को समझकर स्वास्थ्य संबंधी नीतियाँ बनाना आवश्यक है।

प्रेम और संबंध पर प्रभाव

वृश्चिक राशि में बुध के वक्री होने का कर्क राशि के जातकों के प्रेम और संबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इस स्थिति के दौरान, जातक अपनी भावनाओं को अच्छी तरह से व्यक्त करने में कठिनाई महसूस कर सकते हैं। यह समय आंतरिक भावनाओं की गहराई को समझने और उनका आकलन करने का होता है। जब बुध वक्री होता है, तो संचार में बाधाएं उत्पन्न होती हैं, जिससे संबंधों में आवश्यक संवाद की कमी हो सकती है।

कर्क राशि के जातक अक्सर अपने प्रियजनों की भावनाओं का ध्यान रखने में सक्षम होते हैं, लेकिन इस समय उनकी क्षमता में कमी आ सकती है। भावनाओं में उथल-पुथल होने के कारण, विश्वास और समझ के स्तर में भी गिरावट आ सकती है। यह विशेष रूप से ध्यान देने योग्य है, क्योंकि कर्क राशि का स्वभाव संवेदनशील और भावनात्मक होता है। इस वक्री अवधि में, जातकों को अपने संबंधों में सोच-समझकर व्यवहार करने की आवश्यकता है।

विशेष रूप से पुराने या अस्तित्व में पहले से चल रहे रिश्तों में गलतफहमियां बढ़ सकती हैं। यह समय है जब सिद्धांतों और विचारों पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता होती है। नकारात्मक भावनाओं को समझकर उन्हें सुलझाने का प्रयास करना मुख्य है, ताकि संबंधों में सामंजस्य बना रहे। कर्क राशि के जातक अगर खुले दिल से अपने साथी की बात सुनने का प्रयास करें, तो यह उनके संबंधों को और भी मजबूत बना सकता है, चाहे हालात कितने ही चुनौतीपूर्ण क्यों न हों।

अंतत:, बुध का वक्री होना प्रेम और संबंधों में तनाव उत्पन्न करने की संभावना बढ़ा सकता है। इसे सकारात्मक रूप में लेते हुए जातक अपने संबंधों को मजबूत करने और विश्वास का पुनर्निर्माण करने का प्रयास कर सकते हैं।

शिक्षा पर प्रभाव

बुध वक्री की स्थिति का कर्क राशि के विद्यार्थियों पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है। इस अवधि के दौरान, ज्ञान अर्जन और अध्ययन के क्षेत्र में कुछ चुनौतियाँ सामने आ सकती हैं। विद्यार्थियों को अपनी शिक्षा में अस्थिरता और ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है। बुध, जो कि बुद्धि, संचार और अध्ययन का ग्रह माना जाता है, जब वक्री होता है, तो यह तनाव और भ्रम का कारण बन सकता है।

इस अवस्था में, विद्यार्थियों को अपने नोट्स और अध्ययन सामग्री को व्यवस्थित करने में कठिनाई हो सकती है। पुराने विषयों को समझने में भी समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं, जिससे उनकी परीक्षा की तैयारी पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। विशेषकर, गणित और विज्ञान जैसे विषयों में छात्रों को अतिरिक्त धैर्य और ध्यान की आवश्यकता होती है, क्योंकि वे संज्ञानात्मक तनाव का अनुभव कर सकते हैं।

हालांकि, यह चुनौतीपूर्ण समय भी एक अवसर प्रदान करता है। इस दौरान कर्क राशि के विद्यार्थियों को अपनी अध्ययन विधियों को पुनः मूल्यांकन करने का अवसर मिल सकता है। उन्हें चाहिए कि वे ध्यान केंद्रित करने की नई तकनीकें अपनाएं, जैसे कि मेडिटेशन, समय प्रबंधन योजनाएँ, और छोटे-छोटे ब्रेक लेकर पढ़ाई करना। इससे मानसिक थकान कम होगी और वे अधिक प्रभावी ढंग से अध्ययन कर सकेंगे।

इसके अतिरिक्त, यह समय दोस्तों और सहपाठियों के साथ समूह अध्ययन करने का भी है। विचारों का आदान-प्रदान और दूसरों की सहायता से समस्याओं को सुलझाने में मदद मिलेगी। यद्यपि बुध वक्री की अवधि चुनौतीपूर्ण हो सकती है, सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने से कर्क राशि के विद्यार्थी अपने शिक्षा के लक्ष्यों को प्राप्त कर सकते हैं।

कार्य क्षेत्र पर प्रभाव

वृश्चिक राशि में बुध वक्री का प्रभाव कर्क राशि के जातकों पर कार्यालय और कार्य क्षेत्र में महत्वपूर्ण परिवर्तनों का कारण बन सकता है। विशेष रूप से, बुध वक्री के समय, कार्य क्षेत्र में निर्णय लेने में बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। कर्क राशि के जातकों को अपने विचारों को स्पष्ट रूप से व्यक्त करने में कठिनाई हो सकती है, जिससे पेशेवर संबंधों में तनाव उत्पन्न हो सकता है। ऐसी स्थिति में, उन्हें अपनी संचार कौशल पर ध्यान केंद्रित करना आवश्यक है ताकि वे अपने सहयोगियों के साथ बेहतर समझौता कर सकें।

इस अवधि में, कर्क राशि के जातकों को कार्यस्थल पर सहयोगियों के साथ संबंधों को मजबूत करने के लिए सशक्त प्रयास करना चाहिए। कभी-कभी क्या होता है कि, काम का दबाव और वक्री बुध के चलते, समझौता करने में कठिनाई उत्पन्न हो सकती है। ऐसे में, विचार-विमर्श और सहयोग से स्थिति को संभालना महत्वपूर्ण होगा। वे व्यक्ति जो कर्क राशि में जन्मे हैं, उन्हें टीम कार्य में अधिक सक्रिय रहकर, संबंधों को मजबूत और सहयोगात्मक वातावरण का निर्माण करना चाहिए।

वृश्चिक राशि में बुध वक्री के चलते, कर्क राशि के जातकों की पेशेवर वृद्धि में भी कुछ रुकावटें आ सकती हैं। वे अपने लक्ष्यों की दिशा में आगे बढ़ने में असमर्थ महसूस कर सकते हैं। ऐसे में, धैर्य और समय प्रबंधन पर ध्यान देने से उन्हें इस चुनौती को पार करने में मदद मिल सकती है। अपनी क्षमता और प्रयासों पर भरोसा रखते हुए, वे धीरे-धीरे भीड़ में से बाहर निकल सकते हैं और अपने कार्य क्षेत्र में एक बेहतर स्थान बना सकते हैं।

बुध वक्री के दौरान सकारात्मकता बनाए रखना

बुध वक्री के समय, कर्क राशि के जातकों के लिए मानसिक और भावनात्मक संतुलन बनाए रखना महत्वपूर्ण है। यह अवधि अक्सर चिंताओं और भ्रम का समय होता है, लेकिन विभिन्न उपायों से सकारात्मकता को बढ़ाना संभव है। ध्यान और योग का अभ्यास इस समय की चुनौतियों का सामना करने में मदद कर सकता है। साधारण ध्यान तकनीकें, जैसे कि गहरी साँस लेना और ध्यान केंद्रित करना, मन की शांति को बढ़ा सकती हैं। दिन के कुछ मिनटों के लिए ध्यान करने से न केवल मानसिक तनाव कम होता है, बल्कि स्पष्टता और सकारात्मकता भी प्राप्त होती है।

योग की कुछ सरल आसन जैसे कि बालासन और सूर्पवसना, न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को बनाए रखते हैं, बल्कि मानसिक स्थिति को भी संतुलित करते हैं। ये आसन शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं और कर्क राशि के जातकों को शांति का अनुभव कराते हैं। इसके अतिरिक्त, नियमित रूप से प्रकृति में समय बिताना एक सकारात्मक विचार प्रक्रिया को प्रोत्साहित करता है। ताजगी और स्वच्छ हवा का अनुभव करने से मानसिक स्पष्टता बेहतर होती है।

मनोवैज्ञानिक तकनीकों का उपयोग भी इस दौरान बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है। जैसे कि सकारात्मक आत्म-संवाद का अभ्यास करना, नकारात्मक विचारों को चुनौती देना, और समस्याओं के बजाय समाधानों पर ध्यान केंद्रित करना। इससे न केवल आत्म-विश्वास में वृद्धि होती है, बल्कि व्यक्ति की मानसिक स्थिति भी मजबूत होती है। इस समय, सकारात्मकता को बनाए रखने के लिए सामाजिक संबंधों को प्रगाढ़ बनाना भी आवश्यक है। मित्रों और परिवार के समर्थन से, कर्क राशि के जातक खुद को ऊर्जावान और प्रसन्न रख सकते हैं।

उपाय और सुझाव

कर्क राशि के जातकों के लिए बुध की वक्री स्थिति से उत्पन्न चुनौतियों का सामना करने के लिए कई उपाय और सुझाव अपनाना आवश्यक है। सबसे पहले, धार्मिक और आध्यात्मिक उपायों पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है। नियमित रूप से भगवान गणेश की पूजा करना शुभ माना जाता है, क्योंकि वे बाधाओं को दूर करने वाले देवता माने जाते हैं। इसके लिए, प्रतिदिन सुबह को प्रसन्न मन से उनका स्मरण करें और मोती के माला का जाप करें। इसके साथ ही, विशेष रूप से बुध के वक्री होने के दौरान, हरे वस्त्र पहनना तथा हरे रंग के खाद्य पदार्थों का सेवन करना लाभकारी हो सकता है।

जीवनशैली में परिवर्तन भी आवश्यक हैं। कर्क राशि के जातक अगर अपनी दिनचर्या में कुछ छोटे-छोटे बदलाव करते हैं, तो उन्हें बेहतर परिणाम मिल सकते हैं। जैसे, समय प्रबंधन का ध्यान रखते हुए कामों को प्राथमिकता दें और समय पर पूरा करें। यह न केवल मानसिक तनाव को कम करेगा, बल्कि उनके कार्यों में सफलता की संभावनाओं को भी बढ़ाएगा। इसके अलावा, योग और ध्यान का अभ्यास करने से मानसिक शांति और स्थिरता प्राप्त होती है, जो बुध वक्री के दौरान आवश्यक होती है।

सकारात्मक सोच का पालन करना भी महत्वपूर्ण है। कर्क राशि के जातक को चाहिए कि वे अपने विचारों को सकारात्मक रूप में बदलें और कठिनाइयों में भी एक अच्छा पहलू देखें। जैसे ही आप अपने विचारों में सकारात्मकता लाएंगे, आप कठिनाइयों का सामना अधिक आत्मविश्वास से कर पाएंगे। इसके आलावा, उचित आहार और पर्याप्त नींद भी मानसिक स्वास्थ्य को बनाए रखने में सहायता प्रदान करते हैं। इन उपायों को अपनाकर कर्क राशि के जातक बुध वक्री के प्रभावों का आसानी से सामना कर सकते हैं।

निष्कर्ष

वृश्चिक राशि में बुध वक्री का प्रभाव विभिन्न पहलुओं पर व्यापक दृष्टि प्रस्तुत करता है। यह विचार करने योग्य है कि यह खगोलीय घटना न केवल व्यक्तिगत जीवन में बल्कि आत्मा की गहराई में भी परिवर्तन ला सकती है। जब बुध वक्री होता है, तो यह संचार, सोचने की प्रक्रिया और घरेलू जीवन में अड़चनें उत्पन्न कर सकता है। इस समय, लोग अपने सम्बंधों और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति अधिक संवेदनशील हो सकते हैं। ऐसे में, ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि हमें अपने विचारों और भावनाओं को नियंत्रित करने की आवश्यकता है।

वृश्चिक राशि में बुध वक्री का अनुभव करते समय, यह आवश्यक है कि व्यक्ति अपने संबंधों में सुधार की दिशा में प्रेरित हों। यह समय अपने अंदर की आवाज को सुनने और आत्म-प्रतिबिम्बन करने का है। अपने साथी या परिवार के सदस्यों के साथ संवाद में स्पष्टता लाना और समय देंगे, जिससे आपसी समझ और काहिलाई में वृद्धि हो सके।

स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से भी, यह अवधि अपने जीवनशैली में सुधार करने का संकेत देती है। बेहतर खान-पान, नियमित व्यायाम और मानसिक स्वास्थ्य पर केंद्रित ध्यान हमारे समग्र कल्याण में सहायक हो सकते हैं। बुध वक्री के इस प्रभाव को समझते हुए, लोग स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहकर अपने जीवन को बेहतर तरीके से आगे बढ़ा सकते हैं। इस खगोलीय स्थिति के माध्यम से हमें आत्मनिर्भरता और जागरूकता मिलने की संभावना है।

इस प्रकार, वृश्चिक राशि में बुध वक्री के प्रभावों को समझते हुए, हमें अपने लव जीवन और स्वास्थ्य को सुधारने की दिशा में अधिक गंभीरता से सोचना चाहिए।

वृश्चिक राशि में बुध वक्री का कर्क राशि पर प्रभाव जानें। यह लेख परिवार, स्वास्थ्य, प्रेम, शिक्षा, और कार्यक्षेत्र पर पड़ने वाले असर और उपायों के साथ विस्तृत जानकारी प्रदान करता है।

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