मूलांक 9 – साहस, धर्मयुद्ध और भगवद्गीता का निमित्त-भाव
मूलांक 9 मंगल-प्रधान साहस, संघर्ष और त्याग का प्रतीक है। गीता 11.33 के “निमित्तमात्रं भव सव्यसाचिन्” श्लोक के आधार पर यह पोस्ट दिखाती है कि 9 मूलांक की युद्ध-ऊर्जा को व्यक्तिगत अहंकार से हटाकर धर्मयुद्ध, संरक्षण और त्याग की दिशा में कैसे ले जाया जाये, ताकि उसका क्रोध भी लोक-हित में रूपान्तरित हो।









