बसंत पंचमी पर पढ़ें सरस्वती पूजा कथा – जानिए ज्ञान की देवी का जन्म, पूजन विधी, उपाय और शुभ मुहूर्त
माँ सरस्वती की उत्पत्ति: कैसे हुई ज्ञान की देवी का प्राकट्य? पुराणों के अनुसार, सृष्टि की रचना के समय भगवान […]
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माँ सरस्वती की उत्पत्ति: कैसे हुई ज्ञान की देवी का प्राकट्य? पुराणों के अनुसार, सृष्टि की रचना के समय भगवान […]
भारत में प्रत्येक त्योहार का एक विशेष धार्मिक, सांस्कृतिक और वैज्ञानिक महत्व होता है। इन्हीं में से एक महत्वपूर्ण पर्व
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देव दिवाली, जिसे ‘देवतेों की दीवाली’ भी कहा जाता है, विशेष रूप से हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण पर्व है जो हर वर्ष कार्तिक महीने की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस त्योहार का प्रमुख उद्देश्य स्वर्गीय देवताओं के लिए दीप जलाना और उनकी आराधना करना है।
केतु, जिसे ज्योतिष में एक छाया ग्रह के रूप में माना जाता है, को भारतीय ज्योतिष में एक महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। इसकी महादशा, जो लगभग सात साल तक चलती है, व्यक्ति के जीवन पर कई प्रभाव डाल सकती है।
देवी कूष्माण्डा नवरात्रि के नौ रूपों में चौथे स्थान पर पूजी जाती हैं। उनकी उत्पत्ति और महिमा बहुत अद्भुत और विशिष्ट मानी जाती है।
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सोमवार का दिन भारतीय संस्कृति और धर्म में एक विशेष स्थान रखता है। इस दिन का महत्व धार्मिक, सांस्कृतिक और ज्योतिषीय दृष्टिकोण से बड़ा होता है। भारतीय परंपरा में सोमवार का अपना एक अनूठा महत्व रहा है, जो शायद ही किसी अन्य दिन के साथ जुड़े गुणों और परंपराओं के साथ मुकाबला कर सकता है।
गुरुवार का दिन ज्योतिष में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह दिन बृहस्पति ग्रह के प्रभाव में होता है, जो ज्ञान, विद्या, धर्म और संस्कारों का प्रतिनिधित्व करता है। संस्कृत में बृहस्पति को ‘गुरु’ कहा जाता है, और इसे अंग्रेजी में ज्यूपिटर के नाम से जाना जाता है।