
सूर्य राशि और चंद्र राशि: प्रभाव, अंतर और ज्योतिषीय दृष्टिकोण
सूर्य राशि और चंद्र राशि: ज्योतिष में महत्व और प्रभाव सूर्य राशि और चंद्र राशि का परिचय ज्योतिषशास्त्र में, सूर्य

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देव दिवाली, जिसे ‘देवतेों की दीवाली’ भी कहा जाता है, विशेष रूप से हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण पर्व है जो हर वर्ष कार्तिक महीने की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस त्योहार का प्रमुख उद्देश्य स्वर्गीय देवताओं के लिए दीप जलाना और उनकी आराधना करना है।

केतु, जिसे ज्योतिष में एक छाया ग्रह के रूप में माना जाता है, को भारतीय ज्योतिष में एक महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। इसकी महादशा, जो लगभग सात साल तक चलती है, व्यक्ति के जीवन पर कई प्रभाव डाल सकती है।

देवी कूष्माण्डा नवरात्रि के नौ रूपों में चौथे स्थान पर पूजी जाती हैं। उनकी उत्पत्ति और महिमा बहुत अद्भुत और विशिष्ट मानी जाती है।

सूर्य देव चले कन्या राशि में शुक्र केतु से मिलने 🌞 सूर्य का कन्या राशि में गोचर (16 सितंबर 2024

सोमवार का दिन भारतीय संस्कृति और धर्म में एक विशेष स्थान रखता है। इस दिन का महत्व धार्मिक, सांस्कृतिक और ज्योतिषीय दृष्टिकोण से बड़ा होता है। भारतीय परंपरा में सोमवार का अपना एक अनूठा महत्व रहा है, जो शायद ही किसी अन्य दिन के साथ जुड़े गुणों और परंपराओं के साथ मुकाबला कर सकता है।
