
साप्ताहिक राशिफल – मिथुन चंद्र राशि
12 जनवरी 2026 – 18 जनवरी 2026 के लिए मिथुन चंद्र राशि का साप्ताहिक पूर्वानुमान—करियर, धन, प्रेम, स्वास्थ्य और उपाय।
मंगल महादशा में राहु की सक्रियता, वक्री शनि का दबाव और दशम/पंचम संकेत—2026 में “सत्ता परिवर्तन” से अधिक “सत्ता परीक्षा” की परिस्थितियाँ।

वर्ष 2026 भारत के लिए केवल एक कैलेंडर वर्ष नहीं, बल्कि एक गहन राजनीतिक पुनर्संरचना का कालखंड सिद्ध हो सकता है। मेदिनी ज्योतिष में जब किसी राष्ट्र की कुंडली में क्रूर ग्रहों की दशा, वक्री शनि की सक्रियता और राहु का केंद्रीय प्रभाव एक साथ उपस्थित हो, तब सत्ता, नेतृत्व और प्रशासनिक ढाँचे में आंतरिक कंपन उत्पन्न होना स्वाभाविक है। भारत की स्वतंत्रता कुंडली, वर्ष कुंडली (2026) और जैमिनी संकेत—तीनों मिलकर यह दर्शाते हैं कि यह वर्ष ‘सत्ता परिवर्तन’ से अधिक ‘सत्ता परीक्षा’ का है।
व्याख्या-सूत्र: इस लेख में “संकट” का अर्थ अनिवार्य पतन नहीं, बल्कि नेतृत्व-निर्णयों, अनुशासन, संवाद और धैर्य की कठोर परीक्षा है—जहाँ छोटी चूकें बड़े राजनीतिक परिणाम दे सकती हैं।
भारत की स्वतंत्रता कुंडली में 2026 के दौरान मंगल महादशा में राहु अंतरदशा का प्रभाव प्रमुख रहेगा। पाराशरी सिद्धांतानुसार मंगल सत्ता, सैन्य बल, निर्णय और आक्रामकता का प्रतिनिधि है, जबकि राहु भ्रम, फूट, षड्यंत्र और अप्रत्याशित घटनाओं का कारक माना गया है। मंगल–राहु का संकेत सत्ता के भीतर मतभेद, नीति-निर्माण में तीखी धार, तथा नेतृत्व-स्तर पर अहं-संघर्ष को बढ़ा सकता है—यह योग बाहरी विरोध से अधिक आंतरिक असंतुलन उत्पन्न करता है।
शास्त्रीय संकेत (सार-संदर्भ): पराशरी परंपरा में राहु को “भ्रम/विघटन/असामान्य घटनाक्रम” और मंगल को “निर्णय/आक्रामक क्रिया” का कारक माना गया है—दोनों की सक्रियता सत्ता-केन्द्र में तनाव बढ़ा सकती है।
2026 की भारत वर्ष कुंडली में दशम भाव (सत्ता, सरकार, प्रशासन) अत्यंत संवेदनशील स्थिति में माना जा सकता है। दशमेश शनि का वक्री संकेत “पुरानी नीतियों का पुनर्मूल्यांकन”, “प्रशासनिक देरी” और “नैतिक/संवैधानिक दबाव” बढ़ाता है। ऊपर से स्थिरता का आभास बना रह सकता है, किंतु भीतर निर्णय-शक्ति में बाधा, फाइल-स्तर पर विलंब, तथा संस्थागत असंतोष की परतें उभर सकती हैं। जैमिनी मतानुसार दशम भाव पर बाधक-प्रभाव बढ़े तो शासन-व्यवस्था की स्पष्ट निर्णय लेने की क्षमता कमजोर होती है।
2026 में मुन्था का पंचम-भाव संकेत नीति, विचारधारा, मंत्रिमंडलीय बुद्धि और नेतृत्व के नैतिक आधार पर प्रश्नों की तीव्रता बढ़ा सकता है। पंचम भाव में पाप-प्रभाव का अर्थ यह नहीं कि नेतृत्व विफल होगा—पर यह अवश्य दर्शाता है कि निर्णयों की वैचारिक शुचिता, नीति का तर्क, तथा “जन-स्वीकृति” की कसौटी कठिन होगी। यह संकट सड़क पर कम और सत्ता के गलियारों में अधिक गहरा हो सकता है—उत्तराधिकार, नेतृत्व-शैली, तथा रणनीतिक दिशा को लेकर भीतर ही भीतर पुनर्संयोजन की प्रक्रिया चल सकती है।
सावधानी-सूत्र: इस वर्ष “बयान-नीति” (कथन) और “कार्य-नीति” (निर्णय) में अंतर बढ़ने पर नेतृत्व-संकट तीव्र होता है। संतुलित संवाद, संयमित भाषा और संस्थागत समन्वय सबसे बड़ा कवच रहेगा।
1969–71, 1977, 1989 और 1996 जैसे कालखंडों में भी जब मंगल–राहु या शनि–राहु के समान संकेत सक्रिय थे, तब नेतृत्व संकट, दलों का विभाजन, या सत्ता संरचना में बड़े परिवर्तन देखे गए। 1977 में सत्ता-ढाँचे का बदलाव, 1989 के बाद गठबंधन-धारा का उभार, और 1996 में अल्पकालिक सरकारें—इन कालखंडों में वक्री शनि तथा राहु के संकेत निर्णायक रहे। 2026 का संकेत इनसे मिलता-जुलता, किंतु अधिक सूक्ष्म और अंदरूनी प्रकृति का दिखाई देता है।
पाराशरी, गोचर और चंद्रबल संकेतों के आधार पर 2026 में निम्न कालखंड अधिक सतर्कता योग्य माने जाते हैं:
व्यावहारिक संकेत: इन खिड़कियों में “निर्णय-देरी”, “अंदरूनी संवाद-भंग” और “अनुशासन-ढील” संकट को बढ़ाती है; जबकि स्पष्ट संवाद, समयबद्ध कार्यवाही और गठबंधन-समन्वय दबाव को घटा सकता है।
वर्ष 2026 भारत की आंतरिक राजनीति के लिए ‘पलटाव’ नहीं, बल्कि ‘परीक्षण’ का वर्ष है। यह वह समय है जब नेतृत्व की परिपक्वता, धैर्य और दीर्घकालिक दृष्टि की परीक्षा होगी। ग्रह संकेत यह बताते हैं कि जो नेतृत्व वैचारिक संतुलन और रणनीतिक धैर्य बनाए रखेगा, वही सत्ता संरचना को स्थिर रख पाएगा।
यह लेख मेदिनी, पाराशरी और जैमिनी ज्योतिष के शास्त्रीय सिद्धांतों के संकेत-आधारित विवेचन पर प्रस्तुत है; उद्देश्य भय नहीं, बल्कि चेतना, विवेक और दूरदर्शिता प्रदान करना है।
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वर्ष 2026 में भारत की आंतरिक राजनीति किन ग्रह-योगों से प्रभावित होगी? नेतृत्व संकट, सत्ता संघर्ष, प्रशासनिक अस्थिरता और निर्णायक कालखंडों का पाराशरी, जैमिनी एवं मेदिनी ज्योतिष पर आधारित गहन विश्लेषण।
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