
साप्ताहिक राशिफल – धनु चंद्र राशि
12 जनवरी 2026 – 18 जनवरी 2026 के लिए धनु चंद्र राशि का साप्ताहिक पूर्वानुमान—करियर, धन, प्रेम, स्वास्थ्य और उपाय।
सप्तम धुरी, मंगल–राहु सक्रियता और शनि-दृष्टि के आधार पर 2026 में सीमित, लक्षित और तकनीक-आधारित सैन्य घटनाक्रम की संवेदनशील खिड़कियाँ।

भारत–पाकिस्तान संबंध केवल कूटनीति या सामरिक विषय नहीं हैं; मेदिनी ज्योतिष में यह एक सप्तम-धुरी (शत्रु, विदेश-नीति, संघर्ष) के रूप में निरंतर सक्रिय तत्त्व माना जाता है। जब राष्ट्र-कुंडली की सप्तम धुरी पर क्रूर ग्रहों का दबाव बढ़े और साथ ही मंगल–राहु जैसे उग्र संकेत सक्रिय हों, तब पूर्ण युद्ध की अपेक्षा सीमित, लक्षित और संदेशात्मक सैन्य घटनाक्रम की संभावना बढ़ती है। वर्ष 2026 इसी प्रकार का संवेदनशील काल प्रस्तुत करता है।
महत्त्वपूर्ण टिप्पणी: नीचे दिए “कालखंड” संकेत-आधारित हैं—इनका अर्थ “अनिवार्यता” नहीं, बल्कि “संभावना/संवेदनशीलता” है। वास्तविक घटनाक्रम नीति, खुफिया सूचना और परिस्थितियों पर निर्भर करता है।
भारत की स्वतंत्रता कुंडली में 2026 के दौरान मंगल महादशा के भीतर राहु की सक्रिय भूमिका “अचानक” और “अप्रत्याशित” घटनाओं की संवेदनशीलता बढ़ाती है। मेदिनी दृष्टि में मंगल शस्त्र, सैन्य निर्णय, त्वरित प्रतिक्रिया और साहस का कारक है; जबकि राहु छाया-युद्ध, सीमा-उकसावे, भ्रामक कथानक, तथा तकनीकी/साइबर हस्तक्षेप का संकेत देता है। इस युति-प्रभाव से संघर्ष का स्वरूप पारंपरिक युद्ध घोषणा की अपेक्षा अधिक लक्षित और तकनीक-आधारित बन सकता है।
शास्त्रीय संकेत (सार-संदर्भ): बृहत्पाराशर होरा शास्त्र तथा पराशरी परंपरा में मंगल को युद्ध/शस्त्र/आक्रामक निर्णय का प्रमुख कारक माना गया है, और राहु की सहभागिता “अचानकता” एवं “छाया-पद्धति” को बढ़ाती है।
जैमिनी ज्योतिष में सप्तम भाव को शत्रु राष्ट्र, सीमाएँ और प्रत्यक्ष संघर्ष का भाव माना जाता है। यदि सप्तम धुरी पर पाप प्रभाव बढ़े, तथा शासन-निर्णय (दशम/राज्य कारक) पर भी दबाव हो, तो संघर्ष “नीति-निर्णय” के रूप में उभर सकता है। 2026 में संकेत यह बनता है कि कारण-घटना का स्रोत सीमा-उल्लंघन, आतंकी घटना, या उकसावे के उत्तर में “सीमित सैन्य प्रतिक्रिया” हो सकती है—अर्थात लड़ाई का केंद्र “घोषित युद्ध” नहीं, बल्कि “रणनीतिक जवाब” हो।
मंगल यदि सक्रिय हो और उस पर शनि की दृष्टि/दबाव बने, तो संघर्ष का स्वरूप सामान्यतः “दीर्घकालिक युद्ध” की अपेक्षा चरणबद्ध और नियंत्रित दिखाई देता है। शनि सीमाओं पर स्थायी तनाव, सैन्य तैनाती, तथा कूटनीतिक दबाव का संकेत देता है; मंगल त्वरित और निर्णायक कार्यवाही का। इसका संकेत यह हो सकता है कि घटनाक्रम विशेष ऑपरेशन, एयर/ड्रोन आधारित कार्रवाई, सीमित गोलाबारी या साइबर-प्रतिक्रिया के रूप में प्रकट हो—जहाँ लक्ष्य “संदेश” और “प्रतिरोध-क्षमता” का प्रदर्शन हो।
1965, 1971, 1999 (कारगिल) और 2019 जैसे कालखंडों में भी उग्र ग्रह-संकेत (विशेषतः मंगल-सक्रियता) के साथ सीमाओं पर बड़े घटनाक्रम देखे गए। 2026 के संकेत “साम्य” रखते हैं, परंतु इस बार तकनीक, सूचना-युद्ध और वैश्विक दबाव के कारण स्वरूप अधिक सीमित तथा रणनीतिक रह सकता है।
ग्रह-गोचर, दशा-संकेत और संवेदनशीलता-समर्थन के आधार पर 2026 में निम्न खिड़कियाँ अधिक सतर्कता योग्य मानी जा सकती हैं:
सावधानी: इन कालखंडों में अफवाह-आधारित सूचना, उकसावे वाली भाषा और भावनात्मक ध्रुवीकरण से बचना राष्ट्रीय हित में अधिक उपयोगी रहेगा।
वर्ष 2026 भारत–पाकिस्तान संबंधों में “निर्णायक मोड़” जितना नहीं, उतना अत्यंत संवेदनशील अवश्य दिखाई देता है। ग्रह संकेत पूर्ण युद्ध की अपेक्षा सीमित, नियंत्रित और रणनीतिक सैन्य हस्तक्षेप की ओर अधिक संकेत करते हैं। यह घटनाक्रम घरेलू जनभावना, वैश्विक छवि और क्षेत्रीय शक्ति-संतुलन पर प्रभाव डाल सकता है। मेदिनी ज्योतिष का उद्देश्य भय नहीं, बल्कि समय रहते चेतना और विवेक प्रदान करना है—2026 के संकेत उसी सावधानी के रूप में ग्रहण किए जाएँ।
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भारत 2026: भारत–पाक सीमा पर सीमित सैन्य संघर्ष के संकेत 🧵1. मंगल महादशा–राहु अंतर: अचानक उकसावे, तेज़ प्रतिक्रिया, सीमित ऑपरेशन के योग2. वर्षफल में शनि दृष्टि: दीर्घ तनाव, तैनाती, चरणबद्ध रणनीति3. इतिहास तुलनात्मक अध्ययन: 1965/1971/1999/2019 जैसी घटनाओं से साम्य4. संवेदनशील विंडो: 15 जनवरी–2 फरवरी 2026 और 20 अगस्त–7 सितंबर 2026यह लेख भय नहीं, चेतना हेतु है।
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