
भारत 2026: सनातन धर्म और आध्यात्मिक पुनरुत्थान | मेदिनी ज्योतिष
2026 में भारत में सनातन धर्म, मंदिर, तीर्थ, गुरुपरंपरा और आध्यात्मिक चेतना किस दिशा में जाएगी? गुरु, केतु, नवम भाव और द्वादश भाव के आधार पर विस्तृत मेदिनी ज्योतिषीय विश्लेषण।
मूलांक की गणना कैसे की जाती है? – सरल विधि और उदाहरण सहित
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अंकशास्त्र में मूलांक उस व्यक्ति की जन्मतिथि (केवल दिन) से निकला हुआ मूल अंक होता है।
यह हमेशा 1 से 9 के बीच का एक अकेला अंक माना जाता है और
इसे व्यक्ति के मूल स्वभाव, प्रतिक्रिया–शैली और जीवनऊर्जा का बीज–सूचक माना जाता है।
ध्यान रखें:
उदाहरण:
भागवद गीता केवल महाभारत का एक अध्याय नहीं, बल्कि हमारे भीतर चल रहे
संशय बनाम कर्तव्य, मोह बनाम धर्म और भय बनाम विश्वास का शास्त्रीय उत्तर है।
छोटा सार, मोबाइल–फ्रेंडली बिंदुओं में:
इन ही मूल शिक्षाओं को हमने अंकज्योतिषीय मूलांकों के साथ जोड़ा है, ताकि पाठक अपने स्वभाव के अनुसार गीता को और व्यावहारिक रूप में समझ सके।
मूलांक आपकी जन्मतिथि के अंकों के योग से बनता है (1–9 के बीच)।
SEO की दृष्टि से भी यह भाग मुख्य keyword–rich रखा गया है: “अंकज्योतिष, मूलांक, numerology, moolank personality” इत्यादि।
मोबाइल पर एक नज़र में समझने के लिए:
महत्त्वपूर्ण: भागवद्गीता स्वयं मूलांक 1–9 नहीं बताती।
यहाँ गीता–श्लोक और मूलांक का मेल गुण–धर्म (qualities) के साम्य पर आधारित सांकेतिक मिलान है, न कि नया शास्त्रीय सिद्धान्त।
मोबाइल यूज़र के लिए सरल मार्गदर्शन:
संक्षेप में
यह पूरी “भागवद गीता और अंकज्योतिष: 1–9 मूलांकों के लिए दिव्य मार्गदर्शन”
आपको दो स्तर पर सहायता देती है:
नीचे क्लिक कर आप मूलांक 1 से 9 की सभी पोस्ट पर पहुँच सकते हैं –
भागवद्गीता के प्रमुख श्लोकों को अंकज्योतिष के 1–9 मूलांकों के स्वभाव, कर्तव्य और साधना से जोड़ा गया है। इस पेज पर हर मूलांक के लिए अलग पोस्ट, गीता-आधारित मार्गदर्शन और प्रतीकात्मक चित्रों के माध्यम से सरल, व्यावहारिक आध्यात्मिक दिशा समझाई गई है।
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