Author name: bhavishyat.org

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मूलांक 6 – प्रेम, परिवार और भगवद्गीता के समत्वपूर्ण सौन्दर्य की शिक्षा

मूलांक 6 शुक्र-स्वभाव, प्रेम, सौन्दर्य और गृहस्थ-धर्म से जुड़ा है। गीता 12.15 के “यस्मान्नोद्विजते लोको…” श्लोक के आधार पर यह लेख स्पष्ट करता है कि 6 मूलांक जातक कैसे सम्बन्धों में आसक्ति और दिखावे से ऊपर उठकर ऐसा सन्तुलन बना सकते हैं, जहाँ अपने-पराये सभी को शान्ति और सुरक्षा महसूस हो।

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मूलांक 5 – बुद्धि, संचार और भगवद्गीता की एकाग्र “व्यवसायात्मिका बुद्धि”

मूलांक 5 बुध-प्रधान, तेज-तर्रार और परिवर्तनशील बुद्धि का संकेत है। गीता 2.41 के “व्यवसायात्मिका बुद्धिर् एकेह कुरुनन्दन” श्लोक से यह पोस्ट बताती है कि 5 मूलांक को अनेक विकल्पों की भीड़ में बिखरने के बजाय एक ध्येय पर केन्द्रित बुद्धि विकसित करनी चाहिए, तभी उसकी चतुराई सृजनशील शक्ति बनती है।

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मूलांक 4 – श्रम, अनुशासन और गीता का निष्काम कर्म–योग

मूलांक 4 स्थिरता, मेहनत और व्यवहारिक व्यवस्था का अंक है। गीता 3.19 के “तस्मादसक्तः सततं कार्यं कर्म समाचर” श्लोक के आधार पर यह लेख समझाता है कि 4 मूलांक जातक अपने कठोर श्रम और सिस्टम-सोच को निष्काम कर्म-योग बना कर भीतर की चिड़चिड़ाहट से कैसे मुक्त हो सकते हैं।

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मूलांक 3 – ज्ञान, गुरु-भाव और भगवद्गीता का बुद्धि-योग

मूलांक 3 गुरु-तत्त्व, ज्ञान और व्यवस्था का प्रतिनिधि है। गीता 10.10 के “ददामि बुद्धियोगं तं येन मामुपयान्ति ते” के माध्यम से यह पोस्ट दिखाती है कि 3 मूलांक के ज्ञान, शिक्षण और प्रबन्धन क्षमता को कैसे “बुद्धि-योग” में बदला जा सकता है, ताकि विद्या अहंकार नहीं, साधना बने।

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मूलांक 2 – संवेदनशीलता, करुणा और भगवद्गीता के प्रिय भक्त के लक्षण

मूलांक 2 चन्द्र-प्रधान, कोमल और सम्बन्ध-केन्द्रित ऊर्जा का सूचक है। गीता 12.13 के “अद्वेष्टा सर्वभूतानाम् मैत्रः करुण एव च” श्लोक के आधार पर यह लेख बताता है कि 2 मूलांक कैसे भावुकता को करुणा, क्षमा और समत्व में बदलकर सच्चे “प्रिय भक्त” के गुण विकसित कर सकता है।

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मूलांक 1 – नेतृत्व, आत्मविश्वास और भगवद्गीता का आत्म–उत्थान संदेश

मूलांक 1 सूर्य-स्वभाव, नेतृत्व और आत्मविश्वास का प्रतीक है। इस लेख में गीता 6.5 के “उद्धरेदात्मनाऽऽत्मानम्” श्लोक के आधार पर समझाया गया है कि मूलांक 1 जातक अपनी ऊर्जा को अहंकार से बचाकर सही आत्म–उत्थान और धर्ममय नेतृत्व में कैसे बदल सकते हैं।

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अक्षय तृतीया 2025: सोना, दान, धर्म और ज्योतिषीय रहस्य

अक्षय तृतीया केवल सोने-चांदी की खरीदारी का पर्व नहीं, बल्कि धर्म, दान, आत्म-संस्कार और ज्योतिषीय उन्नति का श्रेष्ठ अवसर है। जानिए इसका पौराणिक महत्व, पूजा विधि, कुंडली पर प्रभाव और वह सब कुछ जो इसे अक्षय बनाता है।

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चंद्र राशि अनुसार भोजन: 12 राशियों के लिए #दिव्य_भोजन मार्गदर्शिका

#दिव्य_भोजन ज्योतिष में चंद्रमा मन का कारक है और हमारी भावनाओं को प्रभावित करता है। अपनी चंद्र राशि के अनुसार भोजन चुनकर न केवल शारीरिक स्वास्थ्य, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक ऊर्जा को भी बढ़ाया जा सकता है। इस लेख में जानें 12 राशियों के लिए उपयुक्त आहार और महत्वपूर्ण सुझाव, जो आपके दैनिक जीवन को बना सकते हैं और भी स्वस्थ और संतुलित।

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प्रत्येक चंद्र राशि के लिए शुभ रंग और शुभ दिन: एक ज्योतिषीय मार्गदर्शिका

चंद्र राशि के अनुसार शुभ रंग और शुभ दिन का विस्तृत ज्योतिषीय विश्लेषण। जानें रंगों का मानसिक व शारीरिक प्रभाव, वास्तु, व्यवसाय में उनका महत्व।

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महाशिवरात्रि पर समस्या निवारण हेतु विभिन्न अभिषेक के प्रकार और उनकी विधि

महाशिवरात्रि पर भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए विभिन्न सामग्रियों से अभिषेक किया जाता है। यह लेख आपको समस्या विशेष अनुसार जलाभिषेक, पंचामृत अभिषेक, दुग्धाभिषेक, घृताभिषेक, मधु अभिषेक आदि की विधि और लाभ बताएगा। जानें कि कौन-सा अभिषेक किस समस्या के निवारण के लिए श्रेष्ठ है और किस तरह शिव की कृपा से जीवन को सुख-समृद्धि से भरें।

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