भारत 2026: शेयर बाज़ार, रुपया और सोना | मेदिनी ज्योतिष विश्लेषण
2026 में भारत के शेयर बाज़ार, रुपये की स्थिति और सोना–चांदी जैसी वस्तुओं के मूल्य किन ग्रह-योगों से प्रभावित होंगे? दशा, गोचर और इतिहास के आधार पर विस्तृत ज्योतिषीय विश्लेषण।
2026 में भारत के शेयर बाज़ार, रुपये की स्थिति और सोना–चांदी जैसी वस्तुओं के मूल्य किन ग्रह-योगों से प्रभावित होंगे? दशा, गोचर और इतिहास के आधार पर विस्तृत ज्योतिषीय विश्लेषण।
2026 में भारत की आर्थिक स्थिरता, निवेश प्रवाह और वित्तीय शक्ति किन ग्रह-योगों से प्रभावित होगी? स्वतंत्रता कुंडली, वर्षफल, दशा-गोचर और इतिहास के तुलनात्मक अध्ययन सहित विस्तृत ज्योतिषीय विश्लेषण।
2026 में भारत की आंतरिक सुरक्षा, आतंकवाद और गुप्त गतिविधियाँ किन ग्रह-योगों से प्रभावित होंगी? स्वतंत्रता कुंडली, वर्षफल, दशा-गोचर और इतिहास के आधार पर विस्तृत ज्योतिषीय अध्ययन।
2026 में भारत में सामाजिक अशांति, जनांदोलन और वैचारिक ध्रुवीकरण क्यों बढ़ सकता है? ग्रह-दशा, गोचर, स्वतंत्रता कुंडली और इतिहास के तुलनात्मक अध्ययन से विस्तृत मेदिनी ज्योतिषीय विश्लेषण।
2026 में भारत–पाकिस्तान के बीच सीमित सैन्य संघर्ष की संभावना किन ग्रह-योगों से बनती है? स्वतंत्रता कुंडली, वर्षफल, दशा-गोचर और इतिहास तुलनात्मक अध्ययन सहित विस्तृत मेदिनी विश्लेषण।
वर्ष 2026 में भारत की आंतरिक राजनीति किन ग्रह-योगों से प्रभावित होगी? नेतृत्व संकट, सत्ता संघर्ष, प्रशासनिक अस्थिरता और निर्णायक कालखंडों का पाराशरी, जैमिनी एवं मेदिनी ज्योतिष पर आधारित गहन विश्लेषण।
भागवद्गीता के प्रमुख श्लोकों को अंकज्योतिष के 1–9 मूलांकों के स्वभाव, कर्तव्य और साधना से जोड़ा गया है। इस पेज पर हर मूलांक के लिए अलग पोस्ट, गीता-आधारित मार्गदर्शन और प्रतीकात्मक चित्रों के माध्यम से सरल, व्यावहारिक आध्यात्मिक दिशा समझाई गई है।
मूलांक 9 मंगल-प्रधान साहस, संघर्ष और त्याग का प्रतीक है। गीता 11.33 के “निमित्तमात्रं भव सव्यसाचिन्” श्लोक के आधार पर यह पोस्ट दिखाती है कि 9 मूलांक की युद्ध-ऊर्जा को व्यक्तिगत अहंकार से हटाकर धर्मयुद्ध, संरक्षण और त्याग की दिशा में कैसे ले जाया जाये, ताकि उसका क्रोध भी लोक-हित में रूपान्तरित हो।
मूलांक 8 शनि-सम्बन्धित कर्म, न्याय और परीक्षाओं का अंक है। गीता 2.47 के “कर्मण्येवाधिकारस्ते” श्लोक के माध्यम से यह लेख बताता है कि 8 मूलांक जातक शिकायत और भय से ऊपर उठकर निष्काम कर्म, धैर्य और न्यायप्रिय जीवन जीते हुए अपने संघर्षों को साधना में कैसे बदल सकते हैं।
मूलांक 7 केतु-तत्त्व, शोध और वैराग्य का प्रतीक है। गीता 6.10 के “योगी युञ्जीत सततं आत्मानं रहसि स्थितः” श्लोक के सहारे यह पोस्ट दिखाती है कि 7 मूलांक की अकेलेपन और प्रश्नशीलता को कैसे पलायन नहीं, बल्कि संयमित ध्यान-योग और गहन आध्यात्मिक खोज में बदला जा सकता है।
